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Abhigyaan Shakuntalam, P1

Abhigyaan Shakuntalam, P1

कविकुल गुरू महाकवि कालिदास की गणना भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकारों में की जाती हैं। उन्हें भारत का शेक्सपियर कहा जाता है। जिस कृति के कारण कालिदास को सर्वाधिक प्रसिद्धि मिली वह है उनका नाटक ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ जिसका विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। यह ग्रन्थरत्न भारतीय नाट्यकला का महत्वपूर्ण निदर्शन है जिसके प्रतिपाद्य एवं साज-सज्जा पर मुग्ध होकर जर्मन विद्वान गेटे ने आनन्दविभोर होकर कहा था कि यदि स्वर्गलोक एवं मत्र्यलोक की छवि को एक ही स्थान पर देखना हो तो अभिज्ञानशाकुन्तलम् को देखकर सुखद अनुभूति का रसास्वादन करना चाहिए। ऐसे महान ग्रन्थ पर विश्वविद्यालयी एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सरल भाषा में प्रस्तुत पुस्तक की रचना की गई है। इसमें महाकवि कालिदास और उनके ग्रन्थ पर विभिन्न प्रश्नोत्तरों के साथ ही सभी सात अंकों का हिन्दी अनुवाद तथा श्लोकों की व्याख्या अन्वय, शब्दार्थ, प्रसंग, अनुवाद, संस्कृत व्याख्या सहित की गई है। 

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