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Aadhe Adhure By Mohan Rakesh - Help Book, S127

Aadhe Adhure By Mohan Rakesh - Help Book, S127

आधे–अधूरे आज के जीवन के एक गहन अनुभव–खंड को मूर्त करता है । इसके लिए हिंदी के जीवंत मुहावरे को पकड़ने की सार्थक, प्रभावशाली कोशिश की गई है । इस नाटक की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विशेषता इसकी भाषा है । इसमें वह सामर्थ्य है जो समकालीन जीवन के तनाव को पकड़ सके । शब्दों का चयन, उनका क्रम, उनका संयोजनµसबकुछ ऐसा है, जो बहुत संपूर्णता से अभिप्रेत को अभिव्यक्त करता है । लिखित शब्द की यही शक्ति और उच्चारित ध्वनि–समूह का यही बल है, जिसके कारण यह नाट्य–रचना बंद और खुले, दोनों प्रकार के मंचों पर अपना सम्मोहन बनाए रख सकी । –––यह नाट्यलेख, एक स्तर पर स्त्री–पुरुष के बीच के लगाव और तनाव का दस्तावेज“ है–––दूसरे स्तर पर पारिवारिक विघटन की गाथा है । एक अन्य स्तर पर यह नाट्य–रचना मानवीय संतोष के अधूरेपन का रेखांकन है । जो लोग जिं“दगी से बहुत कुछ चाहते हैं, उनकी तृप्ति अधूरी ही रहती है । एक ही अभिनेता द्वारा पाँच पृथक् भँ निभाए जाने की दिलचस्प रंगयुक्ति का सहारा इस नाटक की एक और विशेषता है । संक्षेप में कहें तो आधे–अधूरे समकालीन जिन्दगी का पहला सार्थक हिंदी नाटक है । इसका गठन सुदृढ़ एवं रंगोपयुक्त है । पूरे नाटक की अवधारणा के पीछे सूक्ष्म रंगचेतना निहित है ।

  • Stock: 20
  • Model: S127
  • Weight: 250.00g
  • SKU: S127
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